Programming Language क्या है एवं इसके प्रकार
शुरूवात से ही मैं आपको एक बात बताना चाहता हूँ कि मैं पूरी कोशिश करूंगा की आप सभी को Programming Language से सम्बंधित संपूर्ण Information या Computer Language की जानकारी इस एक Post में ही मिल जाएँ, तो चलिए Start करते हैं.शायद आप सभी के मन एक सवाल जरूर आया होगा की ये Computer Programming Language क्या है-(What is Programming Language in Hindi) और शायद आप सभी ये भी जानना चाहते होगें कि Programming Language कितने प्रकार के होते हैं.
हजारों सालों से Human आपस में Conversation या अपने Emotions को एक दुसरे को बताने के लिए Language यानी भाषा का उपयोग करते आ रहा हैं. जैसे आप भी किसी से कुछ काम करवाना चाहते हो या बात करनी हो तो आप अपनी Language में उसे कुछ कहते हैं. वैसे ही Computer की भी अपनी स्वयं की भाषा होती है जिसे हम Computer Language कहते हैं. जैसे आप अगर किसी को बोलोगे कि जाओ दरवाजा बंद कर दीजिए तो वो इंसान दरवाजा बंद कर देगा लेकिन Computer को अगर आप बोलोगे की की तुम बंद हो जाओ तो वो बंद नहीं होगा उसके लिए आपको उसी की Language में उसे Instructions देना होगा.
लेकिन Computer के कान तो नहीं है कि वो सुनके अपने आप को Shut Down यानी बंद कर देगा. इसके लिए आपको Alt+f4 Button या Shut Down पे Click करना पड़ेगा. Finally अब Computer तो बंद हो गया लेकिन Computer को कैसे पता चला कि उसे अभी बंद होना है. अब अच्छे से समझो जब आप Shut Down पे Click किये तो “Computer को Instruction दिया गया है ” और इन Instruction या Command को Computer में लिखने के लिए Programming Language का उपयोग किया जाता है. वैसे तो इस Language का उपयोग Software, Application आदि बनाने के लिए किया जाता है.
कुछ Programming Languages के नाम तो आप जानते ही होंगें जैसे c, c++, Java, VB, FOXPRO, SQL, .NET, XML. चलिए अब इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.Programming भाषा क्या है और ये कितने प्रकार की होती हैं.
Programming Language क्या होता है (What is Programming Language in Hindi)
यह एक तरह की Computer Language है. इस Language का उपयोग Software और Program Writing के लिए किया जाता है . Computer के अंदर आप जितने Software और Mobile में जितने भी Application देख रहे हैं वे सभी Programming Language के द्वारा ही बनाए जाते है. जैसे हमारी Humans की Languages में Grammar यानि व्याकरण होता है. वैसे ही Programming Languages को लिखते समझ Grammar मतलब Syntax Rules के मुताबिक ही लिखे जाते हैं.
जैसे की आपको पता होगा एक Program लिखने के लिए Programming Language का प्रयोग किय जाता है. अब आपके मन में एक सवाल आया होगा की ये Program क्या है. एक Program में बहुत सारे Instructions होते हैं और ये Instruction ही Computers को बताते हैं की उन्हें क्या करना है. और एक सवाल अब ये Instruction क्या होते हैं. Instruction में बहुत से Commands होते हैं. एक बात और Programming Statements को Command कहते हैं.
जैसे की मैंने आपको पहले ही बताया C++, C, JAVA, COBOL, FORTRAN, SQL ये सभी एक Programming Languages के नाम है. Write a c Program to find the Sum of 2 numbers या Write a Program to find the Factorial of a Number ?. अब ये दोनों एक एक problem हैं और इनका Solution निकालने के लिए हमें कुछ Instruction लिखने होंगे जिन्हें हम अपनी Language में तो नहीं लिख सकते इसीलिए हम C, C++, JAVA या कोई और Language का उपयोग करके हमें Program लिखना होगा जिसे Computer Execute कर सके.
ALGORITHM :-
Flow chart:-
Pseudo code:-
तो अब शायद आप अच्छे से समझ जाओगे कि Definition of Programming Language :-“programming language एक ऐसी language है जिसका use Computer को कुछ Instruction देने के लिए किया जाता है जिससे Computer कोई work कर सके. आजकल की दुनिया में जितने भी Programming Languages हैं वो सभी High Level Programming Languages के प्रकार में आती हैं. इसका मतलब यह है की इन भाषाओं के कई प्रकार/भाग किये गए हैं. तो चलिए अब जानते हैं Types of programming Language या Programming भाषाओं के प्रकार के बारे में.
Programming Language के प्रकार (Types Of Programming Language in Hindi)
Computer और इंसानों के समझने के मुताबिक programming languages को मुख्यत: 2 भागो में आबंटित किया गया है:-
1. Low level Programming Language/ Machine Level Programming Language/ Binary Language
2. High Level Programming Language
1. Low Level Programming Language (Machine Language)
यह भाषा Computer को बड़ी सरलता से समझ में आती है या यह कह सकते हैं कि यह Machine अर्थात Computer को समझ में आने वाली Language है या फिर इसमे लिखे गए सभी Programs Computer Directly समझ जाता है. यह Computer की करीबी और इंसानों को कम समझ में आने वाली Language होने के कारण इसे Low level language कहते हैं. या machine language या binary language भी कहा जाता हैं.
इस Language में लिखे गए सभी Programs Instruction Computer Direct execute करता है. इस Language में लिखे गए Instruction को समझने के लिए Computer को कोई Translator या Converter की आवश्यकता नहीं होती.
जैसे हमारे प्रधान मंत्री देश-विदेश घुमने जाते हैं तो वहां अपनी Language हिंदी में सब कुछ बोलते हैं परंतु English वालों को तो हिंदी नहीं आती इसीलिए वो एक Translator रखते हैं. जिनका काम हैं जो भी मोदीजी हिंदी में बोलते हैं उस भाषा को English में Translate करते हैं. वैसे ही Computer , Low Level Programming Language को Direct समझ जाता है लेकिन अगर हम बात करें High Level Language की तो इसे Computer Direct नहीं समझ पाता इसीलिए Translator Programs का उपयोग किया जाता है. जैसे Compiler, Interpreter जो HLL(high level language ) को LLL(low level language )मे परिवर्तित करते हैं. HLL के बारे में हम निचे विस्तार से जानेगें.
Low level Language को 2 category में बांटा गया हैं:-
1. Machine Language
2. Assembly Language
1. Machine Language
इस Language में लिखे गए सभी Instruction Computers सीधे Execute करता है. इसे Binary Language भी कहते हैं. क्यूंकि जो भी Program या Code या Instruction, Machine Language में लिखे जाते हैं वे सभी 0 और 1 के Form में लिखे जाते हैं. इसलिए इसका नाम भी Binary Language है. अब थोडा़ ध्यान से समझतें हैं की इसे Machine Language क्यूँ बोला गया है इसका कारण यह है कि Computer यानि Machine की Language है इसलिए.
अगर हम दोनों में अंतर देखे HLL और Machine language मे तो HLL में लिखे गए Programs हमें जल्दी समझ में आ जाते हैं लेकिन वही Program अगर Binary में लिखेंगे तो बस 0 और 1 के अलावा कुछ और नहीं होता है. Computer के लिए 1 का मतलब होता +5 volt और 0 का मतलब होता है 0 volt.
अगर एक नंबर 15 लिखे तो इसका Binary language लिखा जायेगा 1111 और 45 को 101101 ये तो बस numbers थे परंतु “apple” लिखेंगें तो इसका Binary होगा 101010001000100011111011. अगर मैं आपको बोलूँगा 101010001000100011111011 खालो तो आप नहीं समझोगे मगर Computer के लिए 101010001000100011111011 का मतलब है apple. आप Computer में जो कुछ भी लिखते है उन सभी को Computer पहले Machine language में कन्वर्ट/translate करता है.
Binary Language (0,1) को थोडा़ और Improve किया गया जिसके बाद एक और low level programming language बनी जिसका नाम Assembly language हैं.
2. Assembly Language
इसमें फर्क़ सिर्फ इतना ही है की अब 0 और 1 के बदले में इसमें कुछ छोटे शब्दों का उपयोग किया गया जैसे ADD, SUB, MUL, DIV. जिन्हें MNEMONICS कहते हैं . MNEMONICS के उपयोग से ये भाषा हमें समझने में थोड़ी सरलता होने लगी क्यूंकि इसमें 0 और 1 के बदले मे English शब्दों का प्रयोग किया जाता है. निचे छोटा सा Assembly Language का छोटा सा Program लिखा गया है.
इस Assembly program में 10 और 5 को add किया गया है और फिर उसके Result को आउटपुट किया गया है. अभी इस program को Computer Execute नहीं कर सकता कारण यह है कि binary अर्थात Machine language में नहीं है. इसलिए Assembly Language को machine language में कन्वर्ट करने की जरूरत है. इसके लिए एक Software Program का प्रयोग किया जाता है जिसे Assembler कहते हैं जो Assembly Language को Machine Language में कन्वर्ट करेगा.
अब उपर वाले Program 2 पार्ट हैं एक लाइन में जैसे LDA और दूसरा B, 10. LDA को OPCODE कहते हैं और B, 10 को OPERAND कहते हैं . OPCODE यह बताता है कि किस तरह का OPERATION करना है और OPERAND यह बतातहै किहै किनके उपर ऑपरेशन किया जाएगा. LDA अर्थात LOAD TO B REGISTER 10.
इस language का ज्यादातर उपयोग MICROPROCESSOR के PROGRAMMING के लिए किया जाता है. AC, MICROWAVE OVEN, FRIDGE, WASHING machine आदि में इस्तेमाल किया जाता है.
2. High Level Programming Language
High Level Language बोलने का तात्पर्य यह है की इसे हम आसानी से समझ सकते हैं. लेकिन इसे Computer आसानी से नहीं समझ सकते. यहाँ Program को English में जैसे लिखे जाते हैं वैसे ही इसमें लिखे जाते हैं. इस language में लिखे गए Programs में printf, scanf, getch, cin, cout, clear, if, else, switch, case, gets, puts जैसे English शब्दों का उपयोग किया जाता है.
Programmers को इसमें Instruction या Program लिखने मे सरलता होती है. Algorithms को HLL में लिखने में बड़ी आसानी होती है. जैसे की आपको पता है Computer को दो ही नंबर समझ में आते है 0 और 1. इसीलिए HLL में लिखे गए Programs को TRANSLATOR की सहायता से BINARY/MACHINE language में परिवर्तित किया जाता है.
Program in HLL — {TRANSLATOR}— Low Level Language Program
जो Translator convert करने के लिए use किये जाते हैं उन्हें Compiler और Interpreter कहते हैं. Compiler और Interpreter का use HLL Programs को Execute करने के लिए किया जाता है. High Level Language मे लिखे गए Programs को Assembly Code या Object Code या Machine Code में Translate करता है. HLL में जो भी SYNTAX और SEMANTICS का use किया गया है उन्हें Interpret करने की काबिलियत Translator Programs में होनी चाहिए.
High Level Language के ADVANTAGES (फायदे)
- यह language machine के उपर depend नहीं रहती है.
- इसे कोई भी बड़ी आसानी से समझ सकते है और सिख सकते है.
- इस language के programs में कम errors होते हैं.
- Software बनाने के लिए इस language का उपयोग किया जाता है जैसे C, C++, JAVA, .NET, VB.
- इसमें लिखे गए सभी Programs को आसानी से बदलाव और maintain कर सकते हैं.
- Software Company में HLL का ही उपयोग किया जाता है.
- HLL में लिखे गए सभी Program Computer HARDWARE INDEPENDENT है.
- इसमें लिखे गए सभी Programs किसी भी Computer में Execute हो सकते हैं.
High Level Language के Disadvantages (नुकसान)
- इसका सबसे बड़ा Disadvantage यह है की इस Language में लिखे गए सभी Programs को Machine Language में परिवर्तित किया जाता है
- Source code को Object code में Translate करने के बाद शायद यह Computer से सही तरह से execute हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है.
आपने सीखा:-
आज के हमारे इस पोस्ट में हमनें Programming language क्या है (What is Programming Language in hindi) और( Types of Programming Language) Programming Language के प्रकार के बारे में संपुर्ण जानकारी प्रदान की हैं. जिसमें मुख्य रूप से हमनें Machine language या low level language और high level Language के बारे में पढ़ा. मेरा प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए मेरे इस पोस्ट को Social Media जैसे Facebook, Instagram, whats app और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.
सह- धन्यवाद🙏💕
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