What is computer system architecture and parts of computer in hindi
क्या आपको पता हैं कि कंप्यूटर आर्किटेक्चर (Computer System Architecture) kya hai? ऐसे कई सवाल हैं जो अक्सर लोगों को परेशान करते हैं| जैसे हमारे शरीर की संरचना होती है और एक भाग दूसरे भाग से जुड़े होते है ठीक उसी प्रकार से Computer के भी बहुत से भाग होते हैं और वह भाग एक दूसरे से जुड़े होते हैं |
जैसे कि हमारे शरीर में एक अंग दूसरे अंग से जुड़े होते हैं जो यह बताता है कि हमारे शरीर को क्या करना है? ठीक उसी प्रकार Computer का हर एक भाग दूसरे भाग को यह बताता है कि उसे क्या कार्य करना है ? आज हम इस Article में यह जानेंगे कि कम्प्यूटर की मूल और भौतिक संरचना (What is the basic and physical structure of a computer) क्या है और इसके प्रकार हिंदी में (What is Computer Architecture in Hindi) सभी के बारे में हम लोग आज विस्तार से पढ़ेगे |
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Computer System Architecture क्या है?
Computer के भिन्न भिन्न Components एवं उनके बीच सम्बन्ध को कम्प्यूटर की संरचना (Computer Architecture) कहते हैं। लगभग सभी Computers की संरचना एक ही तरह की होती है।
Different Types of Computer System Architecture in Hindi
Computer system architecture बहुत प्रकार के होते हैं , जो निम्नलिखित हैं:-
Von-neumann computer architecture
John von neumann ने 1945 में इस computer system architecture को प्रस्तावित किया था. जिन computers काआज हम use करते हैं वे von-neumann architecture पर ही based होते हैं.
यह architecture stored-program computer concept पर आधारित है. जहाँ instruction data और program data एक ही memory में store रहते हैं.
इसकी निम्नलिखित तीन बेसिक units होती हैं:-
- Central processing unit (cpu)
- Main Memory Unit
- Input/Output unit
Harvard computer architecture in Hindi
इस architecture का use तब किया जाता है जब data और instructions अलग-अलग memory locations में store होते हैं. इसे खास-तौर पर von-neumann architecture के bottleneck को दूर करने के लिए विकसित किया गया था.
instruction और data के लिए अलग-अलग buses होने का main benefits यह है कि cpu एक ही समय में instructions को access भी कर सकता है और data को read / write भी कर सकता है।
harvard architecture के data और instructions के बीच एक strict seperation होता है जिसके कारण यह architecture बहुत ही ज्यादा complicated होता है. परन्तु अलग-अलग pipelines von-neumann architecture के द्वारा बनाए गये bottleneck को remove कर देती हैं.
Instruction set computer architecture in Hindi
Architecture को बनाने के लिए हमें instruction set architecture की जरूरत होती है. क्योंकि इसके पास instruction sets होते है जिन्हें processor समझ सकता है. इसके पास दो instruction set होते हैं:- पहला RISC (reduced instruction set computer) और दूसरा CISC (complex instruction set computer).
RISC architecture को 1970 के दशक में IBM में John Cocke ने design किया था. इसमें instruction के पास बहुत से addressing modes होते हैं. लेकिन program इन सभी का उपयोग नही करता है इसी कारण से बहुत से addressing modes को reduce कर दिया जाता है. यह compiler को instructions को आसानी से write करने में help करता है जिससे performance में सुधार होता है.
CISC architecture compilers की root (जड़) होता है. इसमें instructions को decode करना बहुत ही कठिन (complex) होता है. इसमें बड़ी quantity में compound instructions होते हैं, जिन्हें execute करने में लंबा समय लगता है।
Microarchitecture in Hindi
Microarchitecture को हम computer organization भी कहते हैं. यह ISA (instruction set architecture) का एक hardware implementation होता है. ISA को बहुत से microarchitectures के साथ implement किया जाता है और यह technology के साथ-साथ change होते रहता है.
Example के लिए:- x86-64 एक ऐसा ISA है, जिसका use mostly modern Laptop और computers के द्वारा किया जाता है. इसको बहुत से microarchitectures के द्वारा implement किया जाता है.
इसका use microcontrollers और microprocessors में किया जाता है. कुछ architecture execute होते समय बहुत से instructions को overlap कर जाते हैं परन्तु microarchitecture में ऐसा नहीं होता है.
Computer के कितने भाग होते है?
Computer के मुख्यतः तीन भाग होते हैं, जो निम्नलिखित हैं
- इनपुट/आउटपुट यूनिट (Input/Output Unit)
- सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)
- मैमोरी यूनिट (Memory Unit)
इनपुट यूनिट
Input Device द्वारा हम अपने Data या Instruction अथवा प्रोग्राम को Computer में Input कराते हैं। जो CPU के द्वारा ग्रहण किया जाता है और Memory में उचित जगह पर Store कर दिया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर ALU Memory से ही Data तथा Instruction ले लेता है, जहाँ Control Unit के आदेशानुसार Processing की जाती हैं और परिणाम Output Device को Sent कर दिए जाते हैं या पुनः Memory में ही रख दिए जाते हैं। अन्य सभी Units control unit के नियंत्रण में कार्य करती हैं।Input Unit वे Hardware होते हैं जो Data को Computer में भेजते हैं। बिना Input unit के Computer TV की तरह दिखने वाली एक ऐसी Display unit हो जाता है, जिसमें उपयोगकर्ता कोई कार्य नहीं कर सकता।
Input unit का काम यह है कि हम अपनी भाषा में इसको जो भी Data या Instruction देते हैं। उसे ये Binary Code में परिवर्तन करके Computer (अर्थात् CPU) में भेज देते हैं।
- यह उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए Instructions तथा Data को पढ़ता या स्वीकार करता है।
- यह Instructions और Data को Computer द्वारा स्वीकार किए जाने वाले रूप में बदलती हैं।
- यह बदले हुए रूप में इन Instructions और Data को आगे की Processing के लिए Computer को भेज देता है।
Output Unit
Data तथा Instructions को परिणाम के रूप में प्रदर्शित करने के लिए जिन Units का प्रयोग किया जाता है, उन्हें Output units कहते हैं। Output units का काम यह है कि वह Computer से प्राप्त होने वाले परिणामों को, जो Binay code में होते हैं,हमारे लिए उचित Symbols या Language तथा Image में परिवर्तन करके हमें उपलब्ध कराता है।
- यह Computer द्वारा दिए गए परिणामों को ग्रहण करता है, जोकि Binay code के रूप में होते हैं और जिन्हे हमारे लिए समझना कठिन होता है।
- यह उन कोड के रूप में दिए गए परिणामों को हमारे द्वारा पढ़ने या समझने योग्य रूप में बदल देता है।
- यह बदले हुए रूप में परिणामों को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है या छाप देता है।
Central Processing Unit (CPU)
CPU ही Processing unit और Computer का वह भाग होता है, जिसमें Arithmetic and Logical Operations निष्पादित होते हैं तथा Instructios Decode और Execute किए जाते हैं। CPU Computer के संपूर्ण Operations को नियंत्रित करता है। CPU को Computer का मस्तिष्क (Brain) कहा जाता है। Micro Computer के CPU को Microprocessor भी कहा जाता है। यह Computer के External and Internal Devices को Control करता है |
- यह निर्देशों (Data Instructions) तथा Data को Main Memory से Registers में Transferred करता है।
- Instructions का क्रमिक रूप से Execution करता है।
- आवश्यकता पड़ने पर यह Output Data को Registers से Main memory में Transferred करता है।
CPU के प्रमुख तीन अवयव निम्नलिखित हैं :-
Arithmetic and Logical Unit (ALU)
जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, CPU के लिए सभी प्रकार की अंक गणितीय क्रियाएँ (Add, Subtractin, Multiply and Divide) और तुलनाएँ (दो संख्याओं में यह बतलाना कि कौन-सी छोटी या बड़ी है अथवा दोनों बराबर हैं), इसी Unit में की जाती हैं। यह Unit कई ऐसे Circuits से बनी होती है, जिनमें एक ओर से कोई दो संख्याएँ भेजने पर दूसरी ओर से उनका Sum, Difference, Product or Quotient प्राप्त हो जाता हैं। इसमें सभी क्रियाएँ Binary System में की जाती हैं। प्राप्त होने वाली संख्याओं तथा क्रियाओं के Results को अस्थाई रूप से Store करने या रखने के लिए इसमें कई विशेष बाइटें होती हैं, जिन्हें Resister कहा जाता है।
Control Unit
इस भाग का कार्य अधिक महत्वपूर्ण होता है। यह Computer के सभी भागों के कार्यों पर नज़र रखता है और उनमें परस्पर तालमेल बैठाने के लिए उचित आदेश भेजता है। इसका सबसे प्रमुख और पहला कार्य यह है कि हम जिस Programme का पालन कराना चाहते हैं, यह उसे Memory में से क्रमशः पढ़कर उसका Analysis करता है और उसका पालन कराता है। किसी Instruction का पालन सुनिश्चित करने के लिए वह Computer के दूसरे सभी भागों को उचित instructions जारी करता है।
उदाहरण के लिए, Memory को आदेश दिया जा सकता है कि वह कोई Data किसी स्थान पर Store कर दे या वहाँ से उठाकर (पढ़कर) ALU में भेज दे। Computer के सभी भागों में तालमेल बनाकर Programmes का ठीक-ठाक पालन कराना इसी इकाई का उत्तरदायित्व है।
इस प्रकार CPU की सभी Units द्वारा आपसी सहयोग से उपयोगकर्ता द्वारा बताए गए कार्य किए जाते हैं। इसके लिए जब भी किसी Input की आवश्यकता होती है। वह किसी Input Unit से ले लिया जाता है और जो परिणाम या संदेश आते हैं, उन्हें किसी Output Unit को भेज दिया जाता है।
Memory Unit
Memory Computer का वह हिस्सा है जो Data तथा Instruction को Store करती है। Computer की Memory आधुनिक Computers के Main Works में से एक अर्थात् सूचना भण्डारण (Information Retention) की सुविधा प्रदान करती है। यह Computer के CPU का एक भाग होती है और उससे मिलकर संपूर्ण Computer बनाती है।(i) Primary Memory (ii) Secondary Memory
Primary Memory
इसे Internal या Main Memory भी कहते हैं। यह | CPU से सीधे जुड़ी होती है। इसका अर्थ है कि CPU इसमें store किए गए Instrutions को लगातार पढ़ता रहता है और उनका पालन करता रहता है। इसके साथ ही कोई data ,जिस पर Activity से कार्य किया जा रहा है ,वह भी इसमें store किया जाता है।
Primary memory में किसी समय चल रहे प्रोग्राम/प्रोग्रामों तथा उनके Input Data और Output का Temporary रूप से कुछ अवधि के लिए stote किया जाता है। | जैसे ही उनकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है, उन्हें हटाकर दूसरे Data या Programme को उस स्थान पर रखे जा सकते हैं। Primary Memory का आकार सीमित होता है परन्तु इनकी गति बहुत तीव्र होती है।
- Process किए जाने वाले सभी Data और उसको प्रोसेस करने के लिए आवश्यक Instruction, जो Input साधनों से प्राप्त किए गए होते हैं।
- Processing के मध्यवर्ती (Intermediate) परिणाम।
- Processing के Final परिणाम। उन्हें Output साधन को भेजे जाने तक सुरक्षित रखा जाता है।
Secondary Memory
इस प्रकार की Memory CPU से बाहर होती है, इसलिए इसे External या Secondary Memory भी कहा जाता है। Computer बंद होने तथा बिजली बंद हो जाने पर primary memory में रखी अधिकांश Information नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण न तो हम उसे इच्छानुसार बढ़ा सकते हैं और न हम उसमें कोई सूचना स्थाई रूप से स्टोर कर सकते हैं। इसलिए हमें सहायक मैमोरी (Auxiliary memory) का प्रयोग करना पड़ता है।
इसकी कीमत तुलनात्मक दृष्टि से बहुत कम और Data store करने की Capacity बहुत अधिक होती है। इसमें एक ही कमी है कि इन माध्यमों में Data को लिखने (अर्थात स्टोर करने) तथा पढ़ने (अर्थात् प्राप्त करने) में बहुत समय लगता है। इसलिए हम इसमें ऐसी सूचनाएँ संग्रहित करते हैं, जिन्हें लम्बे समय तक सुरक्षित रखना हो तथा जिनकी आवश्यकता लगातार ना पड़ती हो।
Auxiliary memory का उपयोग Backup के लिए किया जाता है। जब हमें किसी Data की तुरंत आवश्यकता नहीं रहती, तो उसे किसी चुम्बकीय माध्यम; जैसे- Floppy Disk या Magnatic Tape पर नकल करके अलग सुरक्षित कर लिया जाता है। ऐसा प्रायः Hard disc को खाली करने के लिए किया जाता है, ताकि उस पर ऐसा Data भरा जा सके, जिसकी आवश्यकता पड़ रही हो और Disc पर जगह न हो। Backup साधन में Store किए गए Data को आगे कभी आवश्यकता पड़ने पर Hard Disc पर उतारा या नकल किया जा सकता है।
प्रारंभिक Computers में Punched card, Paper tape तथा Magnetic Tapes का प्रयोग सहायक संग्रहण के लिए किया जाता था। लेकिन आजकल मुख्य रूप से Magnetic discs का उपयोग इस कार्य हेतु किया जाता है जो कई प्रकार से सुविधाजनक हैं।
आपने क्या सीखा
दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा यह आर्टिकल कंप्यूटर आर्किटेक्चर (Computer Architecture) क्या है और इसके प्रकार हिंदी में (What is Computer Architecture in Hindi) के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी| इसके लिए आपको और कहीं जाने की जरूरत नहीं है|
यदि आपके मन में इस Article को लेकर कोई Doubt है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ सुधार होना चाहिए तब इसके लिए आप नीचे Comment लिख सकते हैं आपकी इन्हीं विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मौका मिलेगा |
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